By Jitendra Jangid- दोस्तो हिंदू धर्म में वास्तुशास्त्र का बहुत अधिक महत्व हैं, जिसके प्राचीन विज्ञान की मदद से आप अपने जीवन से नाकरात्मकता को दूर कर, जीवन में सकारात्मकता ला सकते हैं, ऐसे में बात करें कर्म की तो कर्म को न केवल हमारे बड़े कार्यों से बल्कि हर दिन हमारे द्वारा किए जाने वाले छोटे, प्रतीत होने वाले महत्वहीन विकल्पों से भी प्रभावित माना जाता है। ये मामूली लग सकते हैं, लेकिन माना जाता है कि इनमें सूक्ष्म ऊर्जा होती है जो हमारे आध्यात्मिक कल्याण को प्रभावित कर सकती है। आइए जानते हमे क्या नहीं करना चाहिए जिसकी वजह से कर्म खराब हो जाते हैं-

उधार के कपड़े पहनना
किसी और के कपड़े पहनने से उनकी ऊर्जा आप में स्थानांतरित हो जाती है, जो आपके कर्म संतुलन को बिगाड़ सकती है।
नाखून चबाना
इस आदत को नर्वस एनर्जी और नियंत्रण की कमी के संकेत के रूप में देखा जाता है, जो दोनों ही आपके कर्म को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकते हैं।
दक्षिण की ओर मुख करके खाना
दक्षिण दिशा की ओर मुख करके खाना पारंपरिक रूप से हतोत्साहित किया जाता है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि यह नकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करता है और सकारात्मक कर्म के प्रवाह को बाधित करता है।

मंगलवार और शनिवार को बाल कटवाना
कई परंपराएँ इन दिनों को बाल कटवाने के लिए अशुभ मानती हैं, उनका मानना है कि ऐसा करने से आध्यात्मिक प्रगति में बाधा आ सकती है।
प्लेट में हाथ धोना
खाने के बाद सीधे प्लेट में हाथ धोना अपमानजनक और अशुद्ध माना जाता है, जो सकारात्मक कर्म ऊर्जा को कम कर सकता है।
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