Jyotish Tips- मनुष्य को जरूर चुकाने पड़ते हैं अपने जीवन में ये ऋण, जानिए इनके बारे में
- byJitendra
- 12 Aug, 2025
By Jitendra Jangid- दोस्तो हिंदू धर्म में ज्योतिष शास्त्र का बहुत अधिक महत्व हैं, जिसका प्राचीन विज्ञान हमें जीवन को सुख और समृद्धि के साथ जीने का मार्ग दिखाता हैं, ऐसे में बात करें मनुष्य की तो वो जन्म के साथ 5 ऋणों से ग्रसित हो जाता हैं, जो कि आध्यात्मिक और नैतिक दायित्व हैं।इन्हें अपने जीवनकाल में चुकाना आवश्यक माना जाता है। ऐसा न करने पर जीवन में कष्ट, पीड़ा और असंतुलन हो सकता है, आइए जानते हैं इनके बारे में-

1. मातृ ऋण (मातृ ऋण)
इसमें न केवल अपनी माँ का ऋण शामिल है, बल्कि परिवार के मातृ पक्ष - नाना-नानी, चाचा-चाची और मौसी का ऋण भी शामिल है। अपनी माँ और मातृ पक्ष के रिश्तेदारों का सम्मान, प्यार, देखभाल और सेवा।
2. पितृ ऋण (पितृ ऋण)
इसमें पितृ पक्ष, जिसमें पिता, दादा-दादी, चाचा-चाची और तीन पीढ़ियों तक के पूर्वज शामिल हैं, शामिल हैं।
ऋण चुकाना: पितृ कर्म (श्राद्ध) करना, पारिवारिक मूल्यों का पालन करना और परिवार के नाम को सम्मानपूर्वक आगे बढ़ाना।
3. देव ऋण (देवताओं का ऋण)
यह उन दिव्य शक्तियों और देवताओं को संदर्भित करता है जो ब्रह्मांड और जीवन को बनाए रखते हैं।
ऋण चुकाना: यज्ञ (यज्ञ), पूजा (उपासना), उपवास (उपवास) और दान (दान/दान) के माध्यम से।

4. ऋषि ऋण (ऋषियों और ऋषियों का ऋण)
यह वह ऋण है जो हम उन ऋषियों और आध्यात्मिक गुरुओं के प्रति रखते हैं जिन्होंने पवित्र ज्ञान को संरक्षित और प्रसारित किया।
ऋण चुकाना: शास्त्रों का अध्ययन करना, धर्म के मार्ग पर चलना और ज्ञान का आदान-प्रदान करना।
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