Jyotish Tips- क्या आप सूर्य को जल सही चढ़ाते हैं, जानिए इसका सही नियम

By Jitendra Jangid- दोस्तो हिंदू घर्म सूर्य को भगवान का दर्जा दिया जाता हैं, जिसकी नियमित पूजा करने से स्वास्थ्य, ऊर्जा और समृद्धि मिलती हैं। सूर्य को जल चढ़ाना, जिसे सूर्य अर्घ्य के रूप में जाना जाता है, कई हिंदुओं द्वारा किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण दैनिक अनुष्ठान है, खासकर सुबह के समय। यह कार्य मन की शांति लाता है, नकारात्मकता को दूर करता है और समग्र कल्याण में सुधार करता है, लेकिन क्या आप जल चढ़ाने का नियम जानते हैं, आइए हम आपको बताते हैं- 

स्नान के बाद अनुष्ठान करें:

सूर्य को जल चढ़ाने से पहले हमेशा स्नान करें। किसी भी धार्मिक अभ्यास के लिए शरीर की शुद्धता आवश्यक है।

पूर्व दिशा की ओर मुख करें:

अनुष्ठान करते समय हमेशा पूर्व दिशा की ओर मुख करें, जो कि उगते सूरज की दिशा है। यह आपकी ऊर्जा को सूर्य की प्राकृतिक लय के साथ संरेखित करता है।

तांबे के बर्तन का उपयोग करें:

पानी तांबे के बर्तन या लोटे से चढ़ाना चाहिए। हिंदू परंपरा में तांबे को शुद्ध और आध्यात्मिक रूप से चार्ज की गई धातु माना जाता है।

पवित्र तत्वों से जल को समृद्ध करें:

पानी में लाल फूल, कुमकुम (सिंदूर) और चावल के कुछ दाने मिलाएं। ये पवित्रता, भक्ति और समृद्धि का प्रतीक हैं।

सूर्य की किरणों को पानी से गुजरने दें:

जब आप धीरे-धीरे पानी डालते हैं, तो सुनिश्चित करें कि सूर्य की किरणें पानी की धारा से गुज़रें और आपके शरीर पर पड़ें। यह शरीर और मन दोनों को ऊर्जा और शुद्ध करता है।

मंत्र का जाप करें:

जल चढ़ाते समय "ओम सूर्याय नमः" मंत्र का जाप करें। यह कार्य की आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाता है और सूर्य देव के प्रति श्रद्धा व्यक्त करता है।